Advertisment

बंटवारे का दर्द और भाई का त्याग: एक इमोशनल कहानी

अक्सर हम जो देखते हैं, सच उससे अलग होता है। भारतीय संस्कृति में संयुक्त परिवार (Joint Family) का गहरा महत्व है। कई बार कड़वे फैसले लेने पड़ते हैं ताकि भविष्य मीठा हो सके। अगर आप एक Heart Touching Story in Hindi की तलाश में हैं

By Lotpot
New Update
batware-ka-dard-aur-bhai-ka-tyag,-emotional-story-1
Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

बंटवारे का दर्द और भाई का त्याग: एक इमोशनल कहानी:- अक्सर हम जो देखते हैं, सच उससे अलग होता है। भारतीय संस्कृति में संयुक्त परिवार (Joint Family) का गहरा महत्व है। कई बार कड़वे फैसले लेने पड़ते हैं ताकि भविष्य मीठा हो सके। अगर आप एक Heart Touching Story in Hindi की तलाश में हैं, तो यह कहानी आपके लिए है। यह दास्तां दो सगे भाइयों—रामलखन और तिलकराज की है। खेत की मेड़ पर हुई एक तकरार ने उनके आंगन में दीवार तो खड़ी कर दी, लेकिन जब मुसीबत आई, तो Bhai Bhai ka Pyar सब पर भारी पड़ा। इस Emotional Hindi Story में आपको बंटवारे का दर्द और भाई का त्याग और रिश्तों की असली गहराई देखने को मिलेगी।

कहानी: कड़वा बंटवारा और मीठा सच

गलतफहमी की पगडंडी

गुल्लू खेत के पास बनी पगडंडी पर तेज़ी से चल रहा था। तभी सामने से उसके चाचा रामलखन आते दिखाई दिए। गुल्लू जल्दी में था, इसलिए वह उनके बराबर से निकल गया, लेकिन उसने उन्हें देखा नहीं।

रामलखन ने गुल्लू को टोकते हुए कहा, "क्यों बे! चाचा दिखाई नहीं दे रहे? ये नहीं कि राम-राम भी कर ले।" गुल्लू झेंप गया, "माफ़ करना चाचा, मैंने देखा ही नहीं। घर जल्दी पहुँचना था। राम-राम चाचा।"

लेकिन तब तक रामलखन का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया था। वे बड़बड़ाए, "हाँ-हाँ! भैया ने मना किया होगा। बंटवारा क्या हुआ, सबके रंग बदल गए।" गुल्लू बिना कुछ बोले सिर झुकाकर आगे बढ़ गया। उसे बड़ों के झगड़े में पड़ना ठीक नहीं लगा।

Advertisment

वह काला दिन (जब भाई-भाई अलग हुए)

batware-ka-dard-aur-bhai-ka-tyag,-emotional-story-2

रामलखन और तिलकराज कभी राम-लक्ष्मण की तरह रहते थे। यह Family Story उस समय बदल गई जब पिता की मृत्यु के बाद घर की जिम्मेदारी और हिसाब-किताब तिलकराज ने संभाल लिया। दोनों भाई दिन भर खेतों में मेहनत करते और घर में अन्न के भंडार भरे रहते।

धीरे-धीरे तिलकराज ने खेतों पर जाना कम कर दिया और रामलखन को हिसाब में घाटा दिखाने लगे। रामलखन सब समझता था, लेकिन बड़े भाई की इज़्ज़त के कारण चुप रहता। लेकिन एक दिन सब्र का बांध टूट गया। रामलखन ने कहा, "भैया, मुझे लगता है हमें अलग हो जाना चाहिए। मैं इतनी मेहनत करता हूँ, फिर भी घाटा क्यों?"

तिलकराज ने गुस्से में लाठी उठा ली, "तू मुझे चोर बता रहा है? तेरा सिर फोड़ दूंगा!" तभी तिलकराज की पत्नी सुजाता बीच में आ गईं। "ये क्या कर रहे हैं आप? मेरी शादी के समय ये छह साल के थे, मैंने बच्चे की तरह पाला है इन्हें। जो मांग रहे हैं, दे दीजिये।"

तिलकराज का गुस्सा ठंडा हुआ और घर व खेतों का बंटवारा हो गया। गाँव वाले हैरान थे कि राम-लक्ष्मण की जोड़ी कैसे टूट गई। यह Hindi Kahani बताती है कि कैसे गुस्सा रिश्तों में दरार डाल देता है।

कुदरत की मार और वापसी

बंटवारे के बाद तिलकराज ने मजदूरों से खेती करवाई, जबकि रामलखन अकेला खटता रहा। रामलखन की पत्नी सुमन अक्सर बीमार रहती थी। उनकी दो बेटियां थीं—लता और आशा।

एक सुबह तिलकराज ने देखा कि रामलखन के घर ताला लगा है और खेत भी सूने हैं। उन्होंने अपनी पत्नी सुजाता से कहा, "पता लगाओ, कहीं वे लोग सब कुछ बेचकर भाग तो नहीं गए?" बहुत ढूंढने पर भी कुछ पता नहीं चला। तिलकराज को चिंता होने लगी, आखिर खून तो अपना ही था।

कुछ दिनों बाद रामलखन वापस आया, लेकिन अकेला नहीं, अपनी दोनों बेटियों के साथ। सुमन साथ नहीं थी। सुजाता ने दौड़कर पूछा, "भैया, कहाँ चले गए थे? और सुमन कहाँ है?"

यह सुनते ही दोनों बच्चियां अपनी ताई (सुजाता) से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगीं, "ताई जी! माँ हमें छोड़कर चली गईं।" सुजाता का कलेजा धक से रह गया। रामलखन ने रोते हुए कहा, "भाभी, उसकी बीमारी उसे खा गई। शहर के बड़े अस्पताल ले गया था, सब कुछ लगा दिया, पर उसे बचा न सका।"

सुजाता ने तुरंत गुल्लू को भेजा, "जा, अपने पिता को खेत से बुला ला!"

दीवारें गिरीं, दिल मिले

तिलकराज दौड़ते हुए आए। जैसे ही उन्होंने भाई की हालत देखी, पुराना गुस्सा आंसुओं में बह गया। उन्होंने रामलखन को गले लगा लिया और बोले, "चिंता मत कर छोटे, मैं हूँ ना।"

तेरहवीं के बाद, जब रिश्तेदार जाने लगे, तो तिलकराज ने सबको रोका। उन्होंने ऐलान किया, "मैं उस बंटवारे को रद्द करता हूँ। मैं अपने भाई को ऐसे नहीं देख सकता। रामलखन, आज से सब तेरा है। तू ही खेती संभाल और पैसे रख। तेरी बेटियों की शादी हम मिलकर करेंगे।"

रामलखन ने भाई के पैर पकड़ लिए, "भैया, मुझे अब कोई लालच नहीं। बस मेरी बच्चियों को माँ का प्यार मिल जाए। भाभी इन्हें संभाल लें, मैं तो अब हरिद्वार जाकर शांति चाहता हूँ।"

तिलकराज रो पड़े, "तू कहीं नहीं जाएगा। हरिद्वार जाने की उम्र हमारी है, तेरी नहीं। आज से तेरी सारी जिम्मेदारी मेरी।"

त्याग का असली सच (Emotional Twist)

batware-ka-dard-aur-bhai-ka-tyag,-emotional-story-3

माहौल भावुक था। तभी सुजाता ने अपने आंसू पोंछे और एक बड़ा राज खोला। वह बोलीं, "देवर जी, जब मैं आपको पाल सकती हूँ, तो क्या इन बच्चियों को अनाथ छोड़ दूंगी? ये मेरी ही बेटियां हैं। और हाँ, एक बात और..."

सुजाता ने अलमारी से एक पासबुक निकाली। "जिस पैसे के हेरफेर का इल्ज़ाम आपने भाई साहब पर लगाया था, वह सारा पैसा इन्होंने खर्च नहीं किया। इन्होंने वो पैसा शहर के बैंक में तुम्हारी बेटियों के नाम पर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करा रखा है, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रहे।"

रामलखन सन्न रह गया। उसने तिलकराज की ओर देखा। तिलकराज ने नम आँखों से मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ छोटे। मैं जानता था कि अगर पैसा हाथ में रहा तो खर्च हो जाएगा। मैं बस तेरी बेटियों के लिए कुछ जोड़ना चाहता था। बस गलती ये हुई कि तुझे बताया नहीं और बुरा बन गया।"

रामलखन फूट-फूटकर रोने लगा और भाई के पैरों में गिर गया। "भैया, मुझे माफ़ कर दो। मैंने आपको चोर समझा, जबकि आप तो मेरे भगवान निकले।"

तिलकराज ने उसे उठाया और गले लगा लिया। उस दिन दोनों परिवारों के बीच की दीवार हमेशा के लिए गिर गई।

इस कहानी से सीख (Moral of the Story)

इस Inspirational Story से हमें यह सीख मिलती है:

  1. रिश्ते अनमोल हैं: पैसे और ज़मीन-जायदाद से बढ़कर भाई का प्यार होता है।

  2. सच्चाई की जीत: कभी-कभी कड़वे फैसलों के पीछे भी मीठी नीयत छिपी होती है। बड़ों का सम्मान और विश्वास कभी नहीं खोना चाहिए।

और पढ़ें:-

ब्राह्मण और सर्प की कहानी: लालच और अटूट भरोसे का सबक

बलि का बकरा: जब निर्दोष भोलू पर आया इल्जाम

ईमानदार लकड़हारा: सच्चाई की जीत | Moral Story in Hindi for Kids

नई सदी का स्वागत: ईशान और नवपुर का नया सवेरा

Tags : bachon ki hindi moral story | clever animal moral story | educational moral story | Hindi Moral Stories | hindi moral stories for kids | Hindi Moral Story | Hindi moral story for kids | hindi moral story for kids and adults | jungle children's story in Hindimoral story for kids in Hindi | Kids Hindi Moral Stories | kids hindi moral story | Kids Moral Stories | kids moral stories in hindi | Kids Moral Story | kids moral story in hindi | Lotpot Moral Stories | Moral Stories | Moral Stories by Lotpot | Moral Stories for Kids | Moral Stories for Kids in Hindi | Moral Story | moral story for children | moral story for kids | Moral Story Hindi | moral story in hindi | moral story in Hindi for kids | moral story with lesson

#moral story with lesson #moral story in Hindi for kids #moral story in hindi #Moral Story Hindi #moral story for kids #moral story for children #Moral Story #Moral Stories for Kids in Hindi #Moral Stories for Kids #Moral Stories by Lotpot #Moral Stories #Lotpot Moral Stories #kids moral story in hindi #Kids Moral Story #kids moral stories in hindi #Kids Moral Stories #kids hindi moral story #Kids Hindi Moral Stories #jungle children's story in Hindimoral story for kids in Hindi #hindi moral story for kids and adults #Hindi moral story for kids #Hindi Moral Story #hindi moral stories for kids #Hindi Moral Stories #educational moral story #clever animal moral story #bachon ki hindi moral story
Advertisment